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सच दिखाने की हिम्मत

जिला आदिम जाति कल्याण विभाग रायसेन में -चादर घोटाला- आरटीआई की जानकारी में हुआ खुलासा,मार्च 2019 में हुई चादरों की खरीदारी , माह दिसंबर 2019 में स्टॉक पंजी में है उल्लेख।

स्थान मध्य प्रदेश लोकेशन रायसेन

नरेन्द्र राय ब्यूरो चीफ रायसेन

जिला आदिम जाति कल्याण विभाग रायसेन में -चादर घोटाला- आरटीआई की जानकारी में हुआ खुलासा,मार्च 2019 में हुई चादरों की खरीदारी , माह दिसंबर 2019 में स्टॉक पंजी में है उल्लेख

* रायसेन ।जिला आदिम जाति कल्याण विभाग प्रदेश के अजा ,जनजातीय वर्ग के छात्र एवं छात्राओं के लिए छात्रावास योजना संचालित करता है। जिसमें गरीब विद्यार्थियों को हॉस्टल में रहकर भोजन नाश्ता ग्रहण कर पढ़ाई करनी होती है।इनमें छात्रावास में छात्र एवं छात्राओं को निशुल्क आवासीय सुविधा,भोजन व्यवस्था, बिस्तर, पुस्तकालय, कोचिंग जैसी अन्य आधारभूत सुविधाएं सरकार के आदेश पर जिला आदिम जाति कल्याण विभाग उपलब्ध कराता है।
जहां एक ओर सरकार द्वारा आदिवासी वर्ग आज तबके के उत्थान के लिए कार्य किया जा रहा है ।,लेकिन जिला आदिम जाति कल्याण विभाग, रायसेन ने गरीब छात्रों को बिछाने के लिए मिलने वाली चादर भी बिस्तर से गायब कर दीं।चादर खरीदी और घोटाले की अगर शासन प्रशासन गंभीरता से जांच करा लें तो घोटालेबाज अधिकारी कर्मचारियों सहित हॉस्टल प्रभारियों की एक बड़ी चैन पकड़ी जा सकती है।
ऐसे पकड़ा हॉस्टलों में चादर घोटाले का मामला….
एंटी हॉर्स ट्रेडिंग फ्रंट के राष्ट्रीय संयोजक हरीश मिश्र ने बताया कि आदिवासी छात्रावास/आश्रमों में अध्ययन रत छात्रों के लिए वर्ष 2019 में 1705 चादर खरीदी गई। उक्त खरीदी में वित्तीय वर्ष 2019 के अंतिम दिन 30-03-19 को 5.86 लाख का चादर का अग्रिम भुगतान किया। जो फिलहाल संदेह के दायरे में है।
जिला आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा मार्च 2019 को 2304 नग चादर 299/ की दर से 723344/ में क्रय करने के लिए मध्य प्रदेश हथकरघा एवं हस्तशिल्प, भोपाल को आदेश दिया था।
बताया जाता है कि हाथकरघा एवं हस्तशिल्प केंद्र को उक्त चादरें 1 सप्ताह के अंदर विभाग को उपलब्ध कराना था।किंतु हाथकरघा एवं हस्तशिल्प केंद्र ने 1705 चादरें 3 माह पश्चात 22 अप्रेल 2019 को 5.86 लाख में प्रदाय की। विभाग ने उदारता दिखाते हुए हथकरघा एवं हस्तशिल्प केंद्र को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन 30-03-19 को 5.85 लाख रुपयों का अग्रिम भुगतान किया।
चादर घोटाले को दबाने विभाग ने गुपचुप तरीके से नई स्टॉक पंजी बनाई….
22 अप्रैल 2019 को विभाग द्वारा खरीदी गई चादरों का स्टॉक पंजी में उल्लेख नहीं किया था। तत्कालीन विभाग के जिला संयोजक मोहित भारती पदस्थ थे।मामला उजागर होने पर,घोटाले को दबाने के लिए विभाग ने नई स्टॉक पंजी बनाई। जिसमें विभाग द्वारा पहले पृष्ठ पर 3 दिसंबर 2019 को 1705 चादरों का स्टॉक दिखाया गया ।उसी रोज चादरों का वितरण दिखाया गया है। इस मामले जांच का विषय यह है कि जिले भर के छात्रावास अधीक्षकों की उपस्थिति 3 दिसंबर 2019 को छात्रावास, आश्रमों में उल्लेखित है और उसी दिन जिला मुख्यालय पर उपस्थित होकर चादर लेकर गए हैं। एक ही दिन में छात्रावास अधीक्षकों की दो जगह उपस्थिति संदिग्ध है। हरीश मिश्रा ने उपरोक्त घोटाले की जांच की मांग की है।
इनका कहना है….
यह चादर घोटाले का मामला फिलहाल मेरे संज्ञान में नहीं है।उस समय डीईओ मोहित भारती पदस्थ थे।फिर भी घोटाले के मामले को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।सरिता नायक जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग रायसेन