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Dharmendra Singh

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April 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

बुद्ध नाथ चौहान रिपोर्टर

परासिया / उमरेठ – मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा गांव को हरा-भरा करने के लिए मनरेगा में वृक्षारोपण को शामिल किया गया है लेकिन देखने में आ रहा है कि गांव के सरपंच और सचिव तथा जनपद के इंजीनियर और अधिकारी अपने भ्रष्ट आचरण के कारण वृक्षारोपण की योजना को फेल कर रहे हैं वृक्षारोपण को लेकर कई घोटाले सामने आ रहे हैं जिसमें एक बड़ा मामला जनपद पंचायत परासिया के ग्राम पंचायत बीजकवाडा का है इस पंचायत के अंतर्गत शामिल कचरा गांव में पंचायत के द्वारा पेड़ लगाना बताया गया लेकिन पानी नहीं मिलने के कारण काफी पेड़ सूख जाने की बात अब सचिव के द्वारा कही जा रही है |

8 लाख 28 हजार की है योजना
कचराम गांव में सरकारी जमीन पर 8,28,000/- की लागत से गत वर्ष 2021 में वृक्षारोपण की योजना बनाई गई थी जिसके लिए गत 17 सितंबर 2021 को सामुदायिक वृक्षारोपण को लेकर बकायदा योजना का पत्थर लगाया गया है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि पत्थर में उसी तारीख को कार्य संपन्न होना बताया गया जबकि पेड़ लगे ही नहीं | वर्तमान में जो पेड़ मेड़ में लाइन से दिखाई दे रहे हैं उनकी संख्या 100 भी नहीं है मात्र 62 पेड़ लगे हुए हैं जो काफी छोटे किस्म के हैं ग्रामीणों के अनुसार इन पेड़ों को पिछली बारिश में लगाया गया है जिसमें आम, जाम, नींबू , अनार आंवला एवं अन्य फलदार वृक्ष शामिल है |

3,40,000/- की राशि निकाली
बीजकवाडा पंचायत के द्वारा कचराम में किए गए वृक्षारोपण को लेकर अभी तक 3,40,000/- की राशि निकाली गई | यह राशि पेड़ लगाने, मजदूरी भुगतान और पानी की सिंचाई के नाम पर निकाली है जानकार सूत्रों का कहना है कि सरपंच एवं सचिव के द्वारा राशि तो निकाली गई जबकि उतनी राशि के हिसाब से वृक्षारोपण हुआ ही नहीं है यह बात गौर करने वाली है कि वृक्षारोपण के कार्य को लेकर बकायदा जनपद का इंजीनियर देखरेख करता है लेकिन कहा जाता है कि इंजीनियर की मिलीभगत के कारण वृक्षारोपण में घोटाला किया गया जिससे शासकीय राशि का सही उपयोग नहीं हुआ और सरकार की योजना पर भी प्रश्नचिन्ह लग गया |

पानी नहीं मिलने से तीस प्रतिशत पेड़ सूख गए
बीजकवाडा ग्राम पंचायत के सचिव रूपेश साहू का कहना है कि वृक्षारोपण को लेकर 150 पेड़ लगाए गए थे इन्हें पानी नहीं मिलने के कारण 30% पेड़ सूख गए है | सचिव के अनुसार गौशाला के सामने भी पेड़ लगाए गए थे और पानी के लिए सामने जो बोर कराया गया था उसमें पानी नहीं निकला है वृक्षारोपण योजना में अभी काम बाकी है जबकि ग्रामीणों का कहना है कि कचराम में 38 लाख की लागत से गौशाला बनाई गई है जिसमें वृक्षारोपण की भी योजना है पंचायत के द्वारा गौशाला के सामने कोई पेड़ नहीं लगाए हैं अगर लगाए होते तो बोर के फेल हो जाने के बावजूद गौशाला के सामने स्थित तालाब में से पानी लाकर पेड़ों में डाला जाता जिससे पेड़ जीवित रहते | सचिव के द्वारा पेड़ लगाने की फर्जी बात कही जा रही है ग्रामीणों का यह भी कहना है कि सरकारी जमीन की मेड पर जो पेड़ लगे हुए हैं गर्मी में उनके सूख जाने का भी खतरा है इसलिए कि तालाब का पानी लगातार सुखते जा रहा है जिसमें अब पानी काफी कम रह गया है गर्मी में तालाब पूरी तरह सूख जाएगा जिससे पेड़ों को पानी नहीं मिल पाएगा | इस तरह देखा जाए तो कचराम वृक्षारोपण योजना पूरी तरह फेल साबित हो गई है |