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Dharmendra Singh

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सच दिखाने की हिम्मत

हिन्दू वर्ष के 350 वर्ष पूर्ण होने पर सरस्वती शिशु मंदिर में शिवाजी महाराज के कर्तव्यो को याद करने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित हुआ।

एस पाटीदार रिपोर्टर

भारत देश मे मुगलो के अत्याचार से वीर प्रतापी
शिवाजी महाराज का खून उबला।



लोकेशन:—-मनावर।

विओ:—–मान सरिता व्याख्यानमाला समिति मनावर द्वारा हिंदू वर्ष के 350 वर्ष होने पर वीर प्रतापी,बहादुर,,बुद्धिमान, शौर्यवीर्य,सनातनी शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजित किया गया। समिति का उद्देश्य राष्ट्र सेवार्थ, संस्कृति प्रवाह एवम धर्म रक्षार्थ हेतु उक्त कार्यक्रम आयोजित किया।। सर्वप्रथम सुखदेव राठौर द्वारा राष्ट्रगीत ” चंदन है इस देश की माटी ,तपोभूमि हर गांव है। हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा -बच्चा राम है “।।का मधुर राग से गायन किया गया। मान सरिता व्याख्यानमाला समिति के प्रथम वर्ष के द्वितीय सोपान पर सरस्वति शिशु मन्दिर मनावर मे वीर शिवाजी के विषय पर व्याख्यान रखे गये। भारत मां की प्रतिमा के सामने दीप जलाकर दीप की स्तुति संस्कृत मे की। कवियत्री दीपिका व्यास एवम श्री रामचरितमानस के सुंदरकांड मंडल के प्रमुख गायक कलाकार श्री पवन पाटीदार द्वारा “संस्कृति अपनी एक है ” लय,भाव,ताल के साथ राष्ट्रगीत गाया गया। विशेष अतिथि हरिओम शर्मा, शिक्षक, बड़वाह एवम प्रवीण खटोड को समीति के प्रमुख जितेंद्र सोनी,सुरेश पटेल, प्रसन्न मित्तल द्वारा शिवाजी महाराज के प्रतिक चिन्ह भेंट किए गए। प्रवक्ता हरिओम शर्मा ने कहा कि सन् 1630 में जब हिंदू का स्वाभिमान शून्य था। बहुत कठिन परिस्थितियां थी। हिंदुओं को छोटी भी नहीं रखने देते थे। जब हिंदू साम्राज्य में जीजामाता की कोख से शिवाजी उत्पन्न हुए तब चारों तरफ हाहाकार मच गया। महाराज जी को संस्कार ,शिक्षा और सनातन धर्म का पालन करने की दीक्षा दी।उनके गुरू समर्थ गुरु रामदास जी थे। उनके गुरू भारत देश के साधु संतो और विद्वत समाज मे विख्यात है।वीर शिवाजी ने मुगलों से युद्ध किया और विजय प्राप्त कर हिंदू साम्राज्य स्थापित किया । 16 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने 3 किलो पर कब्जा कर लिया ।1674 में रायगढ़ के किले से उन्होंने छत्रपति शिवाजी की उपाधि प्राप्त की ।शिवाजी महाराज मराठा समाज के संस्थापक थे। राष्ट्रपुरुष महाराणा प्रताप के साथ वीर शिवाजी की गणना की जाती है। उनकी वीरता के कारण उन्हें एक आदर्श और महान राष्ट्रपुरुष के रूप में माना जाता है । उस समय चोटी रखने पर छोटी काट दी जाती थी। हिंदू समाज मे जब जीजामाता के कोख से शिवाजी उत्पन्न हुए थे। महापुरुषों की कहानी सुनना ही उनका परम कर्तव्य था। भगवान श्री कृष्ण के बाद वीर शिवाजी ने जन्म लिया और शिवाजी ने श्री कृष्ण की नीतियो को अपनाया । कृष्ण की नीतियों पे चलकर देश मे हिंदू साम्राज्य स्थापित करने मे सफल रहे। ।पूरे आत्मविश्वास के साथ वे लड़ते थे ।आजकल पूरे भारत में मैराथन की दौड़ होती है जबकि मैराथन दौड़ की जगह ” पावन खिंड “दौड होना चाहिए । दुनिया की पहली सर्जिकल स्ट्राइक शिवाजी ने की थी। जी एस टी कर निर्धारण में जमीदारों से छुड़ाकर एक जी एस टी व्यवस्था लागू की थी।जबकि शासन ने अभी लागू की। आस्था ,श्रद्धा और विश्वास से सनातन धर्म का पालन करते थे।पृथ्वीराज चौहान के बाद शिवाजी का राज्याभिषेक हुआ। संपूर्ण महाराष्ट्र पर भगवा ध्वज लहराने वाले वीर शिवाजी वेद मंत्रोचार के साथ सुराज्य की स्थापना की। शिवा जी योगी भी थे। उनके गुरु ने उनसे भेंट मांगी थी ।बदलें मे उनहोने पूरा साम्राज्य दे दिया।शिवाजी का गौरवशाली इतिहास रहा है। प्रवक्ता हरिओम शर्मा ने 2 घंटे 10 मिनट के व्याख्यान में श्रोताओ के रोंगटे खड़े कर दिए। समीति के विपुल गंगवाल, आरती सोनी,बरखा राठी उपस्थित थे।कार्यक्रम का संचालन अरविंद पाण्डे ने किया।आभार शैलेन्द्र भार्गव ने माना।