किरण रांका रिपोर्टर

सिद्धालय पर जाने के बाद परमात्मा बनने वाला वह जीव अनंता अनंत काल तक रहेंगे, कोई परिवर्तन होने वाला नहीं है। मनुष्य भव प्राप्त कर आत्म कल्याण कर लिया,वह जीव धन्य हैं।वह अपनी आत्मा के हितैषी है। पांच प्रकार के परिभ्रमण का त्याग कर उत्तम सुख प्राप्त किया।बारह व्रतों का पालन करना चाहिए।जो मिथ्यात्व में जी रहे वह सही उपदेश नहीं दे सकते। पहले अपनी योग्यता मालूम होना चाहिए। भारतीय संविधान को पढ़ें। भारत के नागरिक हैं, तो कोई आपको देश में आने जाने से नहीं रोक सकता। स्वतंत्रता से घूमने का अधिकार। कर्तव्य का पालन करना चाहिए। दोनों रत्नात्रय प्राप्त करने वाले मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं। संसार की बुराईयों को दूर कर दिया है।प्रमाद को छोड़ दिया।अंदर से प्रमाद हटा दो,आत्म हित का काम समय रहते करें।आत्म कल्याण की इच्छा है तो अच्छा पुरुषार्थ करें। अरिहंत बनने की भावना करें। वृद्धावस्था आने के पहले लक्ष्य को प्राप्त करें।
उक्त बातें श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन दिव्योदय अतिशय तीर्थ क्षेत्र किला मंदिर पर चल रहे स्याद्वाद शिक्षण एवं संस्कार शिविर को संबोधित करते हुए ब्रह्मचारी संजय भैया पठारी वालों ने कही। इस अवसर पर काफी संख्या में समाज के श्रावक- श्राविकाओं ने शिविर में प्राप्त ज्ञान पर परीक्षा दी।

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