



महेंद्र चौहान रिपोर्टर
मिली जानकारी अनुसार 14,00000 की लागत से राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के सहयोग से एक स्वयं सहायता समूह पारा में सब्जी विक्रय केंद्र बना रहा है। जिसकी देखरेख मेघनगर से जिम्मी परमार नाम का स्वयं सहायता समूह का कोई कर्मचारी मेघनगर से आकर कर रहा है।जिसने अपनी जेब भरने के चक्कर में परियोजना के काम को पूरा पलीता ही लगा दिया। क्योंकि अभी तो काम शुरू ही हुआ है और काम की पोल खुलने लग गई है। जब हमने जिम्मी परमार निवासी मेघनगर से पूछा की तुम जिस काम को पारा पंचायत प्रांगण में करवा रहे हो इस कार्य योजना के बारे में जानकारी चाहिए कि, सब्जी विक्रय केन्द्र बनाने की परमिशन कहा है, इसका नक्शा कहा है, कितने लोगो को बैठाने की व्यवस्था की जा रही है, इसकी लागत कितने की है। तो जिम्मी परमार ने कुछ भी जानकारी देने से साफ मना कर दिया और कहने लगा आपको जो भी जानकारी चाहिए। वह जानकारी हमारे बॉस देंगे और जब हमने बॉस का नाम पूछा तो न तो बॉस का नाम बताया और न ही कोई कॉन्टेक्ट नम्बर दिया। ओर ना ही ऊपरी अधिकारियों से बात कराई जा रही है। जिसे देख कर साफ कहा जा सकता है कि पूरा पूरा भरष्टाचार हो रहा है। और अपनी मनमानी करके केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। स्पष्ट देखा जा सकता हे कि वास्तव में कितना घटिया काम हो रहा है।देखकर ऐसा लगता हे कि जिम्मी परमार ने अपने निजी स्वार्थ के लिए घटिया काम किया है और अपनी जेब भरी जा रहा है।जिम्मी परमार ने आंगनवाड़ी के विजय स्तंभ (स्टेज) पर ही सब्जी विक्रय केंद्र का ऑफिस बना डाला। आखिर ये जिम्मी परमार कितना पावरफुल है जो खुलेआम भ्रष्टाचार कर रहा है और कोई भी जिम्मेदार इस संस्था इसके खिलाफ कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे है। कहीं जिम्मी परमार ने जांच करने वाली टीम को भी गांधी छापों की लालच दे रखी है जिसके कारण जांच टीम जिम्मी परमार के खिलाफ कोई कार्रवाई करने में रुचि नहीं ले रही है। अब देखना यह होगा कि समाचार लगने के बाद शासन के अन्य आला अधिकारी जिम्मी परमार के द्वारा किए जा रहे घटिया काम की जांच कर रोक पाती है या यह भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा। और जिम्मी परमार को अपनी मनमानी करने दी जाएगी।

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