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Dharmendra Singh

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February 2026
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February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

प्रसाद साहू रिपोर्टर

*लोकेशन रामनगर*



*समूह की महिलाओं के परिजनों ने कलेक्टर को सौपा ज्ञापन निष्पक्ष जांच की करी मांग*


*सतना: (रामनगर)* जिले के रामनगर थाना क्षेत्र के सुलखमा में पिछले दिनों हुए लक्ष्मी स्वसहायता समूह सभी महिलाओं को 5698150 रुपये की राशि गवन करने के अपराध में जेल भेज दिया गया था l आपको बता दें कि इसी वर्ष लक्ष्मी से सहायता समूह को गेहूं खरीदी के लिए केंद्र दिया गया था l
इसके बाद किसानों ने गेहूं खरीदी केंद्र का पैसे ना मिलने की शिकायत जिला कलेक्टर से की थी जिस पर जांच के बाद लक्ष्मी से सहायता समूह की सभी महिलाओं पर आर्थिक अपराध दर्ज किया गया था l
उक्त मामले को लेकर आज महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौप कर मामले में निष्पक्ष जांच करने की माँग की है l
परिजनों ने अपने दिए गए आवेदन में बताया कि लक्ष्मी सहायता समूह की महिलाएं पढ़ी-लिखी बिल्कुल भी नहीं है इसी चीज का फायदा उठाकर सुरेश पाल जो की समूह की सचिव फुलजरिया का देवर है एवं समूह की सदस्य कलावती का पति है जो समूह के कार्यवाही रजिस्टर की लिखा पड़ी करता था l यहां तक की सुरेश पाल समूह की सभी महिलाओं के हस्ताक्षर स्वयं ही करके बैठक की संक्षिप्त कार्रवाई स्वयं ही भर के प्रस्ताव पारित करता रहता था l
कुछ इसी तरह की ही समूह की जरूरत 56 लाख के घोटाले का मास्टरमाइंड सुलखमा का उपसरपंच संतोष गुप्ता तलाश में था अनपढ़ महिलाओं के समूह का फायदा लेने के लिए उसने सुरेश पाल के साथ मिलकर बड़ा घोटाला बड़ी ही सफाई से करता रहा है l

*आखिर कैसे संतोष कुमार गुप्ता ने रची समूह के संचालन की कहानी*- सुलखमा के उप सरपंच संतोष कुमार गुप्ता ने सुरेश पाल के साथ मिलकर कार्यवाही रजिस्टर में लिखा गया कि “केंद्र के कुशल संचालन एवं सहयोग के लिए ग्राम पंचायत सुलखामा के उप सरपंच संतोष कुमार गुप्ता पिता ईश्वर दिन गुप्ता को सहयोगी मार्गदर्शन के रूप में नियुक्त किया जाता है प्रस्ताव क्रमांक 7 उपरोक्त अनुसार नियुक्त किए गए सभी पदाधिकारी को शासन के निर्देशानुसार मानदेय दिया जाएगा उपरोक्त सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए” इसके बाद लक्ष्मी से सहायता समूह की सारी देखरेख संतोष कुमार गुप्ता सुरेश पाल काजल गुप्ता जो कि संतोष कुमार गुप्ता की ही बेटी है को नियुक्त करके भ्रष्टाचार का सारा खेल रचा जाने लगा और इसी के साथ धीरे-धीरे लक्ष्मी से सहायता समूह की अनपढ़ महिलाएं जो कि अपना नाम तक भी लिखना नहीं जानती इस महा भ्रष्टाचार की कहानी की मुख्य पात्र बन गई जबकि इस कहानी के खलनायक संतोष कुमार गुप्ता और सुरेश पाल ही हैl


*संतोष व सुरेश को फर्जी दस्तावेज बनाने व हस्ताक्षर करने में हासिल है महारत* यूं तो उपसरपंच संतोष कुमार गुप्ता और सुरेश पाल को किसी भी कूटरचित दस्तावेज को सही व सत्य बना देते हैं इसके अलावा समूह के सभी महिलाओं के हस्ताक्षर बनाने में भी महारत हासिल है यदि कार्यवाही रजिस्टर में जांच की जाए तो सारे हस्ताक्षर फर्जी एवं कूटरचित है जो यह बताने के लिए काफी है कि लक्ष्मी से सहायता समूह की महिलाओं को कितनी चालाकी के साथ सलाखो के पीछे भेजा गया है l

*जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी होगा*
यदि प्रशासन सही तरीके से इस गंभीर मामले की जांच करता है तो दोषी व्यक्ति संतोष गुप्ता सुरेश पाल जेल में होंगे एवं समूह की निर्दोष महिलाएं जो की गरीबी से गुजर बसर करके अपना परिवार चलाती हैं समाज में इज्जत के साथ अपनी जिंदगी जी सकती हैं l

कहां गया है कि सत्य असहाय हो सकता है परेशान हो सकता है लेकिन पराजित नहीं हो सकता है l