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Dharmendra Singh

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April 3, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

समुद्र मंथन के 14 रत्नों में से गौमाता कामधेनु स्वरूपा रत्न – डाॅ मीना अग्रवाल गौ संस्कृति भारतीय प्राकृतिक दर्शन है – डाॅ. राजकुमार मालवीय मैनिट में गौ रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण एवं सनातन संस्कृति के गौरव गान विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित गाय के गोबर में परमाणु विकिरणों तक को निरस्त करने की क्षमता – डाॅ सविता दीक्षित

समुद्र मंथन के 14 रत्नों में से गौमाता कामधेनु स्वरूपा रत्न – डाॅ मीना अग्रवाल
गौ संस्कृति भारतीय प्राकृतिक दर्शन है – डाॅ. राजकुमार मालवीय
मैनिट में गौ रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण एवं सनातन संस्कृति के गौरव गान विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
गाय के गोबर में परमाणु विकिरणों तक को निरस्त करने की क्षमता – डाॅ सविता दीक्षित
भोपाल। मैनिट में ऊर्जा केन्द्र एवं माँ हिंगलाज सेवा संस्थान के तत्वाधान में गौ रक्षा, पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण एवं सनातन संस्कृति के गौरव गान विषय पर जागरूकता मुहिम अंतर्गत संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जिसमें मुख्य वक्ता सामाजिक कार्यकर्ता डाॅ राजकुमार मालवीय ने ग्रामीण मजदूर स्वयंसेवी महिलाओं को गौ संस्कृति से जोड़कर ईकोफ्रेन्डली उत्पादों के सृजन से स्वावलंबी बनाने की दिशा में नवाचार आधारित माॅड्यूल की प्रस्तावना रखी। राष्ट्र चेतना के जागरण के लिए उन्होंने वक्तव्य की शुरूआत राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर की इन पंक्तियों से किया। राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम्। मेरा कुछ भी नही है, सबकुछ राष्ट्र का ही है। यही भारतीय दर्शन है। जो कि शास्वत और प्राकृतिक है। सनातन वैदिक काल से गाय भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रही है। आज भी असली भारत गांव में बसता है। भारतीय देशी नस्ल की गाय के एक ग्राम गोबर में 3 से 5 करोड़ बैक्टिरिया मोजूद होते है जबकि विदेशी, ब्राजीलियन अथवा जर्सी गाय की नस्ल में मात्र 50 से 70 लाख बैक्टिरिया होते है। बैक्टिरिया घर को विभिन्न जीवाणु और कीटाणु से सुरक्षित रखते है। इसलिए पहले गांवों के घरों की दीवारों और आंगन को गोबर से लेपन किया करते थे। गाय के गोबर को ग्रंथों में सोना कहा गया है। गौ परम सात्विक जीव है। आज भी गौ उत्पाद आर्थिक स्वालम्बन के सुदृढ आधार के लिए प्रासंगिक है। मालवीय ने उपस्थित जनों से ईको फ्रेंडली होली मनाने की अपील की जिसमें उन्होंने गौकाष्ठ एवं गोबर के कंडों से होलिका दहन करने का संदेश दिया। भारतीय संस्कृति में उद्धृत देशी गाय के शुद्ध गोबर से बनी भरगुले की माला से हालिका पूजन करने के लाभों से भी रूबरू कराया।
मैनिट की प्रोफेसर और गौ पर शौध कर रही डाॅ सरिता दीक्षित ने अपने व्यक्तव्य में बताया कि गौ का संग सानिध्य एवं इसके उत्पादों का सेवन मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से कायाकल्प करने वाला पाया गया है। गाय के गोबर में परमाणु विकिरणों तक को निरस्त करने की क्षमता को वैज्ञानिक आधार पर प्रमाणित किया जा चुका है।
कार्यक्रम समन्वयक डाॅ मीना अग्रवाल ने कहा कि समुद्र मंथन में निकले 14 रत्नों में एक कामधेनू गाय भी है जिसे भगवान श्री कृष्ण अपना स्वरूप बताते हैं। गौपालन वैदिक समाज एवं भारतीय संस्कृति का केन्द्रिय तत्व रहा है। परन्तु आज गौपालन उपेक्षा का शिकार तो है ही साथ ही गौपालन में विकृति आ गई है। पंचगव्य द्वारा शरीर में रोग निरोधक क्षमता को बढ़ाकर रोगमुक्त किया जाता है।
जागरूकता संवाद कार्यक्रम में राष्ट्रीय सेवा योजना मैनिट इकाई के समन्वयक डाॅ भरत कुमार मोंढेरा के प्रयासों से जागरूकता संवाद कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयं सेवकों एवं विद्यार्थियों ने भागीदारी की।

गिरजेश पचौरी पत्रकार मेहगांव मोबाइल नंबर 9926264754