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Dharmendra Singh

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February 15, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

गिरनार तीर्थ की भाव यात्रा का हुआ विशेष आयोजन

आष्टा /किरण रांका
नगर के श्री महावीर स्वामी श्वेताम्बर जैन मंदिर, गंज में चातुर्मास हेतु साध्वीमण्डल मंदिर के उपाश्रय में विराजमान है और प्रतिदिन प्रातः 9 से 10.15 तक उनके प्रवचन एवं सत्संग का लाभ सभी को प्राप्त हो रहा है उनके द्वारा करवाये जा रहे धार्मिक आयोजन धर्मानुरागियों के लिये मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। साध्वीमंडल में ढंक तीर्थोद्धारिका प.पू. साध्वी. श्री चारूव्रताश्रीजी म.सा. की शिष्या प.पू. साध्वी श्री नम्रव्रता श्री जी म.सा., मग्नव्रताश्रीजी म.सा. और मीतव्रता श्री जी म.सा. शामिल हैं।
रविवार को प.पू. साध्वीवर्या की पावन निश्रा में गिरनार तीर्थ की भाव यात्रा का विशेष आयोजन रखा गया था। इस यात्रा के लाभार्थी परिवार सुन्दरलाल, प्रकाशचंद, प्रदीप कुमार वोहरा परिवार के सिकंदर बाजार स्थित निवास से यात्रा प्रारंभ होकर गल चौराहा, मानस भवन, सुभाष चौक होते हुये गंज स्थित श्री महावीर स्वामी श्वेताम्बर जैन मंदिर पहुंची जहां के उपाश्रय में साध्वीवर्या नें अपने प्रवचन में कहा कि ‘‘तीर्थ जीवन को तारने वाला होता है, तीर्थ केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं बल्कि एक ऐसा स्थान होता है जहां आत्मा को शांति, जागरण और सत्य की अनुभूति हो और हमारा गिरनार तीर्थ एक ऐसा ही अद्भुत स्थान है। जहां प्रभु नेमिनाथ की लगभग चौरासी हजार वर्ष पुरानी प्रतिमा विराजित है जो किसी भी जैन तीर्थंकर की इस पृथ्वी पर सबसे पुरानी प्रतिमा है। इसके बाद शंखेश्वर पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा का नंबर आता है। साध्वीवर्या नें गिरनार तीर्थ के प्रत्येक स्थान का रेखाचित्र अपने शब्दो के माध्यम से इस प्रकार बनाया कि उपस्थित प्रत्येक जन को गिरनार तीर्थ में ही उपस्थित होकर प्रभु नेमिनाथ की वंदना करने की अनुभूति होने लगी। बीच-बीच में अमन गांग, श्रीमती स्मिता वोहरा व इनकी संगीत टीम अपने सुमधुर भजनो के माध्यम से इस अनुभूति को ओर अधिक गहरा करते गये। प्रवक्ता अतुल सुराणा नें बताया कि जैन धर्म भाव प्रधान है और भाव की कर्म में परिणित होतें है इसलिये हमारे संतजनो द्वारा इस प्रकार की तीर्थ भावयात्रा का आयोजन किया जाता है ताकि अपने स्थान पर रहते हुये भी धर्मप्रेमी जन उस तीर्थ की छवि को मन में रखकर अपनी कल्पनाशक्ति के माध्यम से अपने मन को वहां ले जाकर दर्शन-वंदन कर सकें क्योंकि तीर्थ यात्रा के माध्यम से आत्मा का कल्याण और कर्मो की निर्जरा होती है। इसके पश्चात् प्रभु नेमिनाथ एवं राजुल देवी के विवाह की घटना एवं प्रभु नेमिनाथ के हृदय परिवर्तन एवं दीक्षा ग्रहण करने की घटना को एक सुन्दर संगीत नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। यह नाटिका साध्वीवर्या के निर्देशन में बालिका मण्डल द्वारा तैयार की गई थी जिसका संचालन श्रीमती मोना कुलदीप कोचर द्वारा किया गया। अंत में चातुर्मास समिति द्वारा लाभार्थियों बहुमान किया गया एवं आयोजन का समापन हुआ। आयोजन में वरिष्ठ सुश्रावक सुंदरलाल वोहरा सहित पदाधिकारियों में नगीन वोहरा एडवोकेट, पवन सुराणा, प्रदीप धाड़ीवाल, प्रताप चतरमुथा, पवन श्रीश्रीमाल, श्रीमती भावना वोहरा एवं समाजजनो की उपस्थिति रही।