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Dharmendra Singh

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सच दिखाने की हिम्मत

वन विभाग की जमीन पर प्रधानमंत्री आवास का घोटाला: सीईओ की चुप्पी पर भी उठे सवाल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

खनियांधाना। खनियांधाना

जनपद की ग्राम पंचायत सुलारकला में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वन विभाग की जमीन पर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की मिलीभगत से यह अवैध निर्माण किया गया है। लेकिन इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि वन विभाग के लिखित आवेदन के बावजूद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे उनकी भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

क्या है पूरा मामला….?

दरअसल, सुलारकला पंचायत के सुलारखुर्द गांव में कुछ प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण हो रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ये आवास उस जमीन पर बनाए जा रहे हैं जो वन विभाग के तहत आती है और जिसे प्लांटेशन के लिए आरक्षित किया गया था। इस गंभीर अनियमितता को देखते हुए वन विभाग के डिप्टी रेंजर ने तत्काल कार्रवाई की। उन्होंने न सिर्फ निर्माण कार्य पर आपत्ति जताई, बल्कि जनपद पंचायत खनियांधाना के सीईओ को लिखित में एक आवेदन भी सौंपा, जिसमें उन्होंने तत्काल निर्माण कार्य रोकने की मांग की थी।

सीईओ की चुप्पी: मिलीभगत का संदेह

वन विभाग की लिखित शिकायत के बावजूद, जनपद पंचायत सीईओ ने इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। निर्माण कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहा। ग्रामीणों का मानना है कि सीईओ की यह चुप्पी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि उनकी भी सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के साथ मिलीभगत हो सकती है। ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जब एक सरकारी विभाग ने स्वयं आपत्ति जताई और लिखित शिकायत दी, तब भी सीईओ ने इसे नजरअंदाज क्यों किया। यह सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और अधिकारियों की लापरवाही को दर्शाता है।

आवासों की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल

अवैध निर्माण के साथ-साथ इन आवासों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन आवासों के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे ये जल्द ही जर्जर हो सकते हैं। एक तरफ जहां सरकार गरीबों के लिए बेहतर आवास उपलब्ध कराने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिलकर सरकारी योजनाओं में इस तरह का घोटाला कर रहे हैं।

उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि इस घोटाले में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों सरपंच, सचिव, रोजगार सहायक और जनपद पंचायत सीईओ के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। यह मामला न सिर्फ सरकारी नियमों के उल्लंघन का है, बल्कि गरीबों के हक पर भी डाका डालने जैसा है। देखना यह होगा कि इस बड़े घोटाले पर प्रशासन कब तक अपनी चुप्पी तोड़ता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है

खनियाधाना से संवाददाता अजय शर्मा