
आष्टा/किरण रांका
इंद्रियों को संयमित कर आत्मचिंतन करने का पर्युषण महापर्व बुधवार से शुरू हो गया है।जैन समाज मे श्वेताम्बर परंपरा में 8 दिन जबकि दिगंबर परंपरा में इसे 10 दिनों तक सम्पूर्ण श्रद्धाभावपूर्वक पूरे देश भर में मनाया जाता है।जैन सम्प्रदाय के इस महाव्रत का धार्मिक,सामाजिक,वैज्ञानिक महत्व व जप-तप के बारे में विद्द्यार्थियों को अवगत कराने व उनकी चेतना को जागृत करने के उद्देश्य से आज स्थानीय टैलेण्ट इनोवेटिव हा से स्कूल,आष्टा की प्रार्थना सभा में एक विशेष उद्बोधन रखा गया। इस प्रार्थना सभा में प्राचार्य सुदीप जायसवाल ने उपस्थित स्टाफ सहित समस्त विद्द्यार्थियों को सिद्ध सार्थक णमोकार महामंत्र का उच्चारण करवाकर बताया कि पर्युषण महापर्व के अज्ञान,संशय,मिथ्याज्ञान,राग,द्वेष,स्मृति,धर्म अनादर व योग इन 8 प्रमुख तत्वों का आधार हमें उक्त सभी की नकारात्मकता से बचाकर सकारात्मकता को धारण करने के लिए प्रेरित करता है।यह आत्मशुद्धि, प्रायश्चित्त, धर्मग्रंथों के अध्ययन से हमारे अंदर क्षमा,दया व मैत्री भाव विकसित करने के साथ अहिंसा व सभी को समान एवं सम्मानित जीवन जीने देने का संदेश देता है,इसीलिए पर्युषण महापर्व को जैन परंपरा में समस्त पर्वो का राजा भी कहा जाता है,जिसमे क्षमाभाव सहित सकलजनों द्वारा उपवास,प्रार्थना व ध्यान जैसी साधना से विश्वशांति एवं जनकल्याण की कामना की जाती है।इस अवसर पर उपस्थितअभिभावकों ने भी समस्त विद्द्यार्थियों हेतु इस सकारात्मक संदेश व आयोजन की प्रशंसा कर प्रसन्नता व्यक्त की।

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