भ्रष्टाचार का ‘धुंधला’ खेल: अमरपुर देवरा पंचायत में सरकारी खजाने में सेंध की आशंका
अपठनीय बिलों ने खोली पोल, सरपंच–सचिव की भूमिका सवालों के घेरे में
शिवपुरी जिले के खनियाधाना जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत अमरपुर देवरा इन दिनों विकास कार्यों के कारण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों और सरकारी भुगतान से जुड़े ‘धुंधले बिलों’ को लेकर सुर्खियों में है। पंचायत द्वारा प्रस्तुत किए गए भुगतान वाउचर और बिलों में सामने आई भारी अनियमितताओं ने न केवल पंचायत प्रशासन, बल्कि पूरी निगरानी व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
पारदर्शिता के नाम पर धब्बा
सरकारी कार्यों में पारदर्शिता अनिवार्य मानी जाती है, लेकिन अमरपुर देवरा पंचायत में इसके ठीक उलट तस्वीर दिखाई दे रही है। हमारे संवाददाता की पड़ताल में सामने आया है कि पंचायत द्वारा भुगतान के लिए लगाए गए कई बिल और वाउचर इतने धुंधले और अपठनीय हैं कि उनमें न तो सामग्री की मात्रा स्पष्ट है, न ही सप्लायर (वेंडर) का नाम और न ही कुल भुगतान राशि।
डिजिटल इंडिया के दौर में यह सवाल लाजमी है कि ऐसे अपूर्ण और अस्पष्ट दस्तावेजों को आखिर किस आधार पर स्वीकृति दी गई? क्या यह तकनीकी चूक है, या फिर सरकारी धन को ठिकाने लगाने के लिए सुनियोजित तरीका?
सरपंच–सचिव की मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों और स्थानीय जानकारों का आरोप है कि यह पूरा खेल सरपंच और सचिव की मिलीभगत से चल रहा है। लोगों का कहना है कि जमीन पर काम बेहद कम, जबकि कागजों में खर्च भरपूर दिखाया गया है। धुंधले बिल लगाने का उद्देश्य साफ प्रतीत होता है—ताकि कोई यह न जान सके कि पैसा किस मद में और कितना निकाला गया।
जब बिल ही स्पष्ट नहीं होंगे, तो ऑडिट में अनियमितता कैसे पकड़ी जाएगी? जानकार इसे सीधे तौर पर शासकीय राशि के गबन की आशंका से जोड़कर देख रहे हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि इतनी स्पष्ट गड़बड़ियों के बावजूद स्थानीय प्रशासन की चुप्पी बनी हुई है। सवाल उठता है कि क्या जनपद पंचायत स्तर पर इन बिलों का सत्यापन किए बिना ही भुगतान की अनुमति दे दी गई? अगर हां, तो यह लापरवाही नहीं बल्कि संरक्षण का संकेत भी हो सकता है।
ग्रामीणों में आक्रोश, जांच की मांग
ग्राम पंचायत अमरपुर देवरा के निवासी अब खुलकर अपनी आवाज उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जबकि सरकारी पैसा कागजों में पानी की तरह बहाया जा रहा है। पैसा कहां गया—इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
पड़ताल में सामने आए प्रमुख बिंदु
भुगतान वाउचर में जानबूझकर अस्पष्टता
सामग्री सप्लाई बिलों में वेंडर की जानकारी संदिग्ध
बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान की आशंका
निगरानी और सत्यापन तंत्र की गंभीर विफलता
अब सवाल यही है…
अमरपुर देवरा का मामला केवल एक पंचायत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम की खामियों को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागता है और इन “धुंधले बिलों” के पीछे छिपे साफ सच को सामने लाता है, या फिर यह मामला भी फाइलों के ढेर में दबकर रह जाएगा।
जनता को अब इंतजार है—न्याय और ठोस कार्रवाई का।
खनियाधाना से संवाददाता: अजय शर्मा

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