कटनी में ईमानदारी बनाम माफियाराज! कर्तव्यनिष्ठ महिला CSP नेहा पच्चीसिया क्यों हैं निशाने पर….?
कटनी। कटनी जिले में एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों के लिए यहां निष्पक्ष होकर काम करना मुश्किल होता जा रहा है? शहर में चर्चा है कि जब भी कोई अधिकारी अवैध कारोबार, माफिया तंत्र और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई करता है, उसके सामने प्रशासनिक और अन्य तरह की चुनौतियां खड़ी हो जाती हैं।
इसी क्रम में नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) नेहा पच्चीसिया का नाम भी चर्चा में है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की तो उन्हें लगातार दबाव और विरोध का सामना करना पड़ा।
बताया जा रहा है कि उनके कार्यकाल के दौरान अवैध शराब के कारोबार, ओवरलोड वाहनों और रेत परिवहन पर सख्ती बरती गई। शहर में लंबे समय से चल रहे कई अवैध कारोबारों पर कार्रवाई होने से संबंधित लोगों में हड़कंप मच गया। आरोप है कि इसके बाद उनसे कुछ महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां वापस ले ली गईं, जिनमें न्यू कटनी जंक्शन (NKJ) थाना प्रभार, परिवहन वाहनों की चेकिंग से जुड़े अधिकार तथा अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इसी बीच हाल ही में सामने आए एक दुष्कर्म प्रकरण को लेकर भी कई सवाल उठे। आरोप है कि मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन शिकायत सामने आने के बाद प्रकरण उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई। इस मामले में भी सीएसपी की सक्रियता चर्चा का विषय बनी।
वहीं, एक अन्य मामले में सीएसपी के विरुद्ध दिए गए एक आवेदन को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। जानकारी के अनुसार संबंधित व्यक्ति ने आवेदन देने के अगले ही दिन उसे वापस ले लिया था। इसके बावजूद उसी आवेदन को आधार बनाकर सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों में प्रचारित किए जाने की बातें सामने आ रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं और इसे लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं।
शहर के सामाजिक और जागरूक वर्ग का कहना है कि यदि कोई अधिकारी निष्पक्ष होकर कानून का पालन कराता है, तो उसे सहयोग मिलना चाहिए, न कि अनावश्यक विवादों में घसीटा जाना चाहिए। वहीं दूसरी ओर यह भी मांग उठ रही है कि यदि किसी अधिकारी के विरुद्ध कोई शिकायत है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो, लेकिन यदि शिकायत निराधार है तो संबंधित अधिकारी का मनोबल कमजोर करने वाली गतिविधियों पर भी रोक लगनी चाहिए।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सभी पक्षों के तथ्यों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जिले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कटनी में कानून के अनुसार काम करने वाले अधिकारियों को पूरा संरक्षण मिलेगा, या फिर वे लगातार दबाव की राजनीति का सामना करते रहेंगे।

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