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Dharmendra Singh

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February 15, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

*महिला दिवस पर सम्मान समारोह एवं विचार गोष्ठी का आयोजन** “
*छात्राओं ने सुनाई अपने संघर्ष से सफलता की कहानी*

शासकीय महाविद्यालय तामिया में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर महिला सम्मान समारोह और समूह चर्चा का आयोजन किया गया। आज पूरे विश्व में महिला शक्ति को नमन करने हुए, महिलाओं का सम्मान किया जा रहा है। इसी क्रम मुख्य अतिथि डाॅ. वीणा साहू ने छात्राओं से कहा किया कि कहा कि आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के साथ हमने 21 वी सदी में प्रवेश कर लिया है। यह सपना और लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है जब महिलाएं भी पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश, समाज और परिवार के कार्यों में बराबरी का हाथ बढाये। इसके लिये महिलाओं को आत्मनिर्भर बनना होगा। इस अवसर पर उन्होने छात्राओं को स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान की।
प्राचार्य डाॅ. महेन्द्र गिरि ने कहा कि महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से ही परिवार की दशा और दिशा बदल सकती है। साथ ही देश और समाज के विकास के लिए निर्धारित लक्ष्य को हासिल किया जा सकेगा। प्रो मालती बनारसे ने कहा कि महिलाओं के हौसलो को बुलन्द करने और समाज में फैली असमानता को दूर करने के संकल्प के रूप में ही हर वर्ष महिला दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर पुरातन वातावरण और बंदिशों से संघर्ष कर महाविद्यालय में अध्ययन कर रही *छात्राओं ने भी अपने अनुभव शेयर किये*।

*कु.प्रिया उइके*( बी.ए.तृतीय वर्ष) – मेरे परिवार का कहना है कि “तुम लडकी हो ज्यादा पढकर क्या करोगी” अतः मुझे बाहर पढाई के लिये नही भेजा गया, मेरे पापा ने मुझे आश्वत किया है कि वे मुुझे पढ़ने के लिए बाहर अवश्य पहुंचाएंगे ताकि मैं अपने लक्ष्य को हासिल कर सकूं।

*कु. शिवानी ठाकुर*( बी.ए.तृतीय वर्ष ) – ” हमारे समाज में लडकियों को ज्यादा महत्व नही दिया जाता है। परन्तु जब मैने 10 वी बोर्ड परीक्षा पास की तब उन्हें समझ आया कि लड़कियाँ भी किसी से कम नही है।”

*कु. वर्षा भारती*( बी.ए. द्वितीय वर्ष) – “हमारे समाज में यह धारणा है कि यदि लड़कियाँ शिक्षा प्राप्त कर नोकरी करती भी है तो उसका फायदा उसके ससुराल वालों को प्राप्त होगा हमे नही इसलिए हमें पढाई नही करने दिया जाता है। समाज की सोच है कि लड़के ही हमारे बुढापे का सहारा बनेंगे अतः उन्हें ज्यादा पढाया जाता है।

*कु.अरूणा धुर्वे* (बी.ए.तृतीय वर्ष) – “मैं अपने माता पिता को धन्यवाद देती हूॅ कि उन्होंने हम 7 भाई बहनो को पढ़ाया लिखाया और इसके लिए बाहर भी जाने दिया। मेरा समाज से यही कहना है कि भेदभाव नही करना चाहिएं।”

*कु. प्रियंका भारती*( बी. ए. तृतीय वर्ष) – “मेरे परिवार में कोई पढा लिखा नही है। मेरे पापा भी नही है। फिर भी मेरी माॅ ने मुझे पढाई में पूरा सहयोग दिया।”
*कु. वर्षा विश्वकर्मा* (बी.ए.तृतीय वर्ष) ने बताया कि “मेरे परिवार में लड़कियों को पढना ज्यादा उचित नही समझा जाता है। इसलिये मुझे और मेरी बहन को स्कूल जाने से रोक दिया गया था। किन्तु मैंने जिद की और अच्छे नम्बर से पास होकर दिखाया इस तरह से मैं कॉलेज में आ सकी हूं।”