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Dharmendra Singh

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सच दिखाने की हिम्मत

किरण रांका रिपोर्टर

न्यायालय परिसर, आष्टा में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के आदेशानुसार दिनांक 12.11.2022 को नेशनल लोक अदालत माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सीहोर के श्री रामानंद चंद के निर्देशन में सम्पन्न हुई। सर्वप्रथम माॅ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष तहसील विधिक सेवा समिति, आष्टा के अध्यक्ष माननीय प्रथम जिला न्यायाधीश, श्री सुरेश कुमार चौबे तथा द्वितीय जिला न्यायाधीश श्री कंचन सक्सेना, न्यायाधीशगण श्रीमती वंदना त्रिपाठी, श्री एम.एन.एच. रजवी, श्रीमती ऋचा राजावत, सुश्री आयुषी गुप्ता, भारतीय स्टेट बैंक, आष्टा कन्नौद रोड, कन्नौद मिर्जी, कोठरी, जावर, के मुख्य शाखा प्रबंधक भगत सिंह , श्री अनिल सिंह, कैलाश पवार, संदीप जैन, फील्ड आॅफिसर भारत नाथानी, दीपक वर्मा, उमेश परमार, महेन्द्र बैरागी, पकंज सिंधिया, म.प्र. विद्युत वितरण कम्पनी लिमिटेड के डीजीएम श्री अजय कुमार वाधवानी, प्रबंधक श्री भानू तिवारी, श्री सुरेश प्रताप सिंह, सहायक प्रबंधक शिवराम पाली, योगेश साहू, जितेन्द्र यादव, राजेन्द्र देवड़े सहायक राजस्व अधिकारी श्री रोहिता मेवाड़ा, केपीओ श्री सुनिल रिया मध्यप्रदेश लाॅ एंड पब्लिक वेलफेयर काउंसिल के जिला अध्यक्ष धीरज धारवां अधिवक्ता संघ अध्यक्ष तेज सिंह भाटी, सचिव भूपेश जामलिया एवम् कर्मचारीगण ने माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर नेशनल लोक अदालत का प्रारंभ किया गया। लोक अदालत का चर्चित मामला यह रहा कि शौभाखेड़ी निवासी अलका बाई अपने दो बच्चों के साथ डेढ़ बर्ष से घर पर पति सुनील कुमार से मनमुटाव के कारण घर बैठी थी उसे श्री सुरेश कुमार चौबे प्रथम जिला न्यायाधीश, आष्टा तथा न्यायाधीश श्री एम.एन.एच.रजवी आष्टा तथा पूर्व अध्यक्ष ताज मोहम्मद ताज अधिवक्ता की समझाईश से पति सुनील कुमार के साथ प्रकरण में समझाईश देकर राजीनामा करवाया गया एवं पुष्पगुच्छ देकर दोनों को हंसी-खुशी के साथ रहने हेतु ससुराल रवाना किया गया। इसी प्रकार श्रीमती ललिता बाई पति नरबत सिंह से मनमुटाव के कारण बच्चों को अपने साथ रखने के लिए प्रकरण दर्ज कराया। जिसमें श्री सुरेश कुमार चौबे, प्रथम जिला न्यायाधीश आष्टा एवं न्यायाधीश श्री कंचन सक्सेना, तथा के.एल. पैरवाल अधिवक्ता द्वारा समझाईश से पति नरबत सिंह के साथ प्रकरण में समझाईश देकर राजीनामा करवाया गया एवं पुष्पगुच्छ देकर दोनों को साथ-साथ रवाना किया गया। लंबित प्रकरणों में प्रथम जिला न्यायाधीश श्री एस.के.चौबे के न्यायालय मे कुल 200 विद्युत प्रकरण निराकरण के लिए रखे गए थे। जिसमें से राजीनामा अनुसार कुल 120 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 2106526 रूपये राशि जमा करायी गयी, बैंक प्रीलिटिगेशन के कुल 30 प्रकरण जिसमें से 10 का निराकरण हुआ और 20 पक्षकारगण को 488800 रूपये राशि राजीनामा अनुसार जमा करायी गई तथा अन्य प्रकरण जिसमे कुल 29 प्रकरणों में 29 पक्षकारो को 550446 समझौता राशि दिये जाने के आदेश न्यायालय द्वारा किये गये। द्वितीय जिला न्यायाधीश कंचन सक्सेना के न्यायालय मे कुल 46 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गये थे जिसमें से 26 प्रकरणों का निराकरण हुआ। जिसमें 59 पक्षकारगण को 1450000रूपये का लाभ हुआ। न्यायिक मजि. प्रथम श्रेणी श्रीमती वंदना त्रिपाठी के न्यायालय में प्रीलिटिगेशन के सम्पत्तिकर/जलकर के कुल 56 प्रकरणों का निराकरण हुआ जिसमें 56 पक्षकारगण 432346 रूपये जमा कराये गये तथा अन्य 76 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिनमें 25 प्रकरणों में आपसी सहमति से प्रकरणों का निराकरण हुआ। तथा 56 पक्षकारों को 6248316 रूपये का लाभ प्राप्त हुआ, इसी प्रकार श्री एम.एन.एच. रजवी के न्यायालय में कुल 912 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें ने 35 प्रकरणों का निराकरण हुआ जिसमें 62 पक्षकार 2050000 रूपये लाभान्वित हुए। श्रीमती ऋचा राजावत के न्यायालय में 35 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें से 26 प्रकरण निराकृत हुए तथा 56 पक्षकारगण को 3070000 रूपये का लाभ प्राप्त हुआ। सुश्री आयुषी गुप्ता के न्यायालय में 41 प्रकरण निराकरण हेतु रखे गए थे जिसमें से 41 प्रकरण निराकृत हुए तथा 111 पक्षकारगण को 3826440 रूपये का लाभ प्राप्त हुआ।