-आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी महाराज
इरफ़ान अंसारी रिपोर्टर

उज्जैन:- माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष महोदय, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमान आर. के. वाणी साहब के निर्देशानुसार जीवन जीने की कला विषय पर मंगल प्रवचन कार्यक्रम का आयोजन जैन तपोभूमि संस्थान उज्जैन में किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान आदिनाथ की मूर्ति के समक्ष जिला न्यायाधीश एवं सचिव श्री अरविंद कुमार जैन, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री चन्द्रेश मण्डलोई तपोभूमि के ट्रस्टी श्री अशोक जैन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर परमपूज्य गुरुदेव आचार्य श्री प्रज्ञासागरजी महाराज ने उपस्थित लोगों को संबोधित कर अमृतवाणी से आशीर्वचन कहे कि “यदि जीवन में पसारा फैलाते हैं, तो समेटने का सामर्थ्य भी होना चाहिए” संसार में व्यक्ति थोड़ा सी धन-संपदा प्राप्त होने पर अभिमान प्रकट करने लगते हैं। विधि विरुद्ध कार्य न करने कानून का सम्मान करना चाहिए। आचार्य श्री ने जीवन जीने की कला विषय पर प्रेरक प्रसंग सुनाकर सद आचरण में रहने हेतु प्रेरित किया। संसार रूपी कीचड़ में उसी प्रकार जीवन जीना चाहिए, जिस प्रकार कमल कीचड़ में रहकर भी उससे से मुक्त रहता है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को चाहिए कि जीवन में सदैव ही सदकर्म करे और अच्छा आचारण अपनाकर समाज और देश की सेवा में काम आये। मुनीवर ने सभी को शुभाशीष प्रदान करते हुए जीवन में सदाचार, सद्भाव सदकर्म, धर्म, शील, सत्य, त्याग, तप, दान, सरल स्वभाग, मृदुभाषी, प्रेम इत्यादि मौलिक तत्वों को अपनाते हुए अपने प्रभु का स्मरण करना चहिए तथा काम, क्रोध, लोभ, मद, मोह, माया, अहंकार, ईर्ष्या, द्वेष एवं सभी बुराईयों से दूर रहकर अच्छाई के मार्ग पर चलना चाहिए।
इस अवसर पर जिला न्यायाधीश एवं सचिव श्री अरविंद कुमार जैन, जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री चन्द्रेश मण्डलोई, तपोभूमि संस्थान के ट्रस्टी श्री अशोक जैन, पैरालीगल वॉलंटियर श्री प्रसन्न बिलाला, श्री जीवनधर जैन, श्री प्रवीण जैन एवं काफी संख्या में लोग उपस्थित रहे।

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