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February 4, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

चित्रकला में मध्यप्रदेश राज्यस्तरीय सम्मान प्राप्त, अलका पाठक की कृति ऋतु वैभव को मिला श्रेष्ठ राज्यस्तरीय वाकणकर पुरुस्कार, कुलसचिव विक्रम विश्वविद्यालय के द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं 10000 की नगद राशि के साथ किया गया पुरुस्कृत

किरण रांका रिपोर्टर

आष्टा/ किसी ने सही कहां है की प्रतिभा किसी स्थान और साधनों की मोहताज नहीं होती है वह सीमित साधनों मैं भी अपनी प्रतिभा को परिष्कृत कर समाज में श्रेष्ठ स्थान सुनिश्चित कराती है, इन्हीं बातों को सिद्ध किया है आष्टा नगर की बहू श्रीमती अलका मनीष पाठक ने चित्रकला के क्षेत्र में राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त किया।अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरातत्ववेत्ता पद्मश्री चित्रकार डॉक्टर विष्णु श्रीधर वाकणकर स्मृति में लोकमान्य टिलक सांस्कृतिक न्यास द्वारा आयोजित 31 वी राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता 2022 का श्रेष्ठ पुरस्कार आष्टा नगरपुरोहित स्व.श्री जगदीश चंद्र पाठक की पुत्र वधू अलका मनीष पाठक को इस वर्ष 2022 का चित्रकला के क्षेत्र में उनकी कृति ऋतू वैभव को श्रेष्ठ कृति रूप में चयनित किया गया।76 प्रतियोगी में हुई चयनित:- यह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में विभिन्न दूरस्थ शहरों से 1100 कलाकृतियां प्राप्त हुई इसमें से राज्य स्तर पर 76 कृतियां चयनित की गई। जिनमे से आपकी कृति ऋतूवैभव को श्रेष्ठ पुरुस्कार दिया गया। निर्णायक के रूप में ख्याति प्राप्त चित्रकार श्री शंकर शिंदे इंदौर, श्री हरेंद्र शाह इंदौर, एवं डॉक्टर श्री कृष्ण जोशी उज्जैन एवं सांस्कृतिक न्यास के कार्यपालन अधिकारी श्री गिरीश भालेराव एवं प्राचार्य ज्ञानेंद्र शर्मा ने आपकी कृति ऋतुओं पर आधारित ऋतु वैभव को श्रेष्ठ कृति के रूप चयनित कर श्रेष्ठ कृति के रूप सम्मानित कर पुरस्कार प्रदान किया।चौथी बार मिला सम्मान:- ज्ञात रहे इसके पूर्व भी आपको लोकमान्य तिलक सांस्कृतिक न्यास द्वारा तीन बार यह सम्मान प्राप्त हो चुका है। ऋतुवैभव ने बढ़ाया आष्टा का मान:- ऋतु के वैभव पर आधारित श्रीमती पाठक की कृति ऋतुवैभव ने सभी का ध्यान अपनी और आकर्षित किया और इससे आष्टा शहर की महक संपूर्ण प्रदेश में फैली।सफलता का श्रेय:- श्रीमती पाठक अपनी सफलता का श्रेय कलासाधक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अपने पिता स्वर्गीय श्री सूर्यकांत त्रिवेदी व संपूर्ण आष्टा नगर को देती है। 4 दिसंबर को मिलेगा शिप्रा अलंकरण सम्मान:- आप सभी के स्नेह से पुनः 4 दिसंबर को महाकाल की नगरी उज्जैन में वाश चित्रकारी के उन्नयन हेतु निरंतरता एवं आपके योगदान हेतु श्रीमति पाठक को 4 दिसंबर को शिप्रा अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।