Chief Editor

Dharmendra Singh

Office address -: hanuman colony gole ka mandir gwalior (m.p.) Production office-:D304, 3rd floor sector 10 noida Delhi Mobile number-: 9806239561, 9425909162

May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031
May 20, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

तलाकशुदा मुस्लिम महिला (Muslim Women) के गुजारा भत्ते को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला इद्दत तक ही नहीं बल्कि पूर्व शौहर से जीवनभर गुजारा भत्ता (Alimony) पाने की हकदार है.

इरफ़ान अंसारी रिपोर्टर

तलाकशुदा मुस्लिम महिला (Muslim Women) के गुजारा भत्ते को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि तलाकशुदा मुस्लिम महिला इद्दत तक ही नहीं बल्कि पूर्व शौहर से जीवनभर गुजारा भत्ता (Alimony) पाने की हकदार है.

तलाकशुदा मुस्लिम महिला को दूसरी शादी करने तक या जीवन भर अपने पूर्व शौहर से गुजारा भत्ता पाने का अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि गुजारा भत्ता इस तरह का हो कि वह तलाक से पहले जैसा जीवन बिता रही थी, उसी तरह का जीवन जी सके.

कोर्ट ने प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय, गाजीपुर के केवल इद्दत अवधि तक ही गुजारा भत्ता दिलाने के आदेश को अवैध करार दिया है. इसके साथ ही इस आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अदालत ने वैधानिक उपबंधों और साक्ष्यों का सही परिशीलन किए बगैर आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम महिला संरक्षण कानून के तहत मजिस्ट्रेट को अर्जी दी जा सकती है. कोर्ट ने कहा मुस्लिम महिला (तलाक अधिकार संरक्षण) कानून 1986 की धारा 3(2) के तहत पूर्व शौहर से मजिस्ट्रेट के समक्ष गुजारा भत्ता दिलाने की अर्जी दाखिल कर सकती है.

याचिकाकर्ता महिला को हर महीने मिलेंगे 5,000

जाहिद खातून नाम की महिला ने कोर्ट में याचिका दाखिल की थी जिसकी अपील को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था. कोर्ट ने सक्षम मजिस्ट्रेट को नियमानुसार गुजारा भत्ता और मेहर की रकम की वापसी पर तीन महीने में आदेश पारित करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने तब तक याचिकाकर्ता जाहिद खातून के पति को अपनी तलाकशुदा बीवी को पांच हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम गुजारा भत्ता भुगतान करने का निर्देश दिया है. जस्टिस एस पी केसरवानी और जस्टिस एम ए एच इदरीसी की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है.

Must join for more legal updates…
सुप्रीमकोर्ट अधिवक्ता नूपुर धमीजा