महाराष्ट्र राज्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा
हत्तीरोग उन्मूलन के लिए ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ (आईडीए) अभियान में सफल प्रयास जारी….
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महाराष्ट्र सहित देश भर में हत्तीरोग (लिम्फैटिक फाइलेरिया) के उन्मूलन के लिए ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ (आईडीए) यानी आइवरमेक्टिन, डीईसी (डायथाइलकार्बामजीन) और एल्बेंडाजोल दवाओं के संयुक्त उपचार को गति दी जा रही है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2027 तक भारत से हत्तीरोग को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है और राज्य सरकार इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रही है।
मुख्य बातें:
प्रभावी कदम: मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने हत्तीरोग जैसी उपेक्षित बीमारियों के लिए प्रभावी उपाय शुरू किए हैं।
महाराष्ट्र की पहल: 2017 में, महाराष्ट्र ने विशेष रूप से विदर्भ के जिलों के लिए इस उपचार को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का अनुरोध केंद्र सरकार से किया था।
लाभार्थी: इस पहल से महाराष्ट्र, विशेषकर विदर्भ के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के कष्ट कम करने में मदद मिल रही है।
प्रधानमंत्री का सपना: देश से हत्तीरोग को जड़ से मिटाने के प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने में महाराष्ट्र सरकार पूर्ण सहयोग दे रही है।
राज्य में 55 लाख नागरिकों को उपचार का लाभ देने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के माध्यम से देश के 12 राज्यों में बड़े पैमाने पर ‘मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन’ (MDA) अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें महाराष्ट्र भी शामिल है। इस अभियान के तहत पात्र नागरिकों को हर साल निवारक दवाएं दी जाती हैं, जिससे बीमारी के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है। राज्य में विशेष बात यह है कि कुछ चुनिंदा जिलों में पारंपरिक दो दवाओं के बजाय ‘ट्रिपल ड्रग थेरेपी’ (IDA) का उपयोग किया जा रहा है। यह उपचार पद्धति अधिक प्रभावी मानी जाती है और कम समय में बीमारी को नियंत्रित करने में मदद करती है।
महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र में हत्तीरोग का भारी प्रकोप है, जिसके चलते गडचिरोली, भंडारा और चंद्रपुर जैसे जिलों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। राज्य में लगभग 55 लाख नागरिकों को इस उपचार का लाभ देने का लक्ष्य रखा गया है।
नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में अभियान के कारण सूक्ष्म कीटाणुओं की प्रसार दर
एक प्रतिशत से कम लाने में सफलता
महाराष्ट्र के नागपुर, चंद्रपुर, भंडारा, वर्धा, गडचिरोली, अमरावती, अकोला, लातूर, धाराशिव, सोलापुर, जलगांव, सिंधुदुर्ग, नांदेड़, ठाणे, पालघर, नंदुरबार और यवतमाल जैसे 18 जिलों में इस बीमारी का प्रभाव है। फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में हत्तीरोग के कुल मामलों में से लगभग 75% मरीज अकेले नागपुर विभाग में हैं।
सर्वाधिक प्रभावित पांच जिले:
भंडारा,चंद्रपुर,नागपुर,गडचिरोली, गोंदिया
हत्तीरोग उन्मूलन अभियान: नागपुर ग्रामीण में बड़ी सफलता
ट्रिपल ड्रग पॉलिसी (IDA) की सफलता दर:
इस अभियान के कारण नागपुर ग्रामीण क्षेत्र में सूक्ष्म कीटाणुओं के प्रसार की दर (MF Rate), जो 2014 में 4.91% थी, उसे 2024 तक 1% से भी कम करने में सफलता मिली है।
मुख्य बिंदु:
प्रभावी उपचार: विशेषज्ञों के अनुसार, ‘IDA’ उपचार से माइक्रोफिलेरिया (परजीवी) को कम करने में अधिक प्रभावी मदद मिलती है, जिससे रोग के प्रसार को तेज़ी से रोका जा सकता है।
सरकार की अपील: राज्य सरकार नागरिकों से यह आह्वान कर रही है कि वे अफवाहों पर विश्वास न करें और स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख में ही ये दवाएं लें।
महेश पांडुरंग शेंडे की रिपोर्ट….

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