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May 10, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

विशाल भौरासे रिपोर्टर

स्वर संगम घोष शिविर का उद्घाटन आज प्रातः पंडित दीनदयाल उपाध्याय सनातन धर्म इंटर कॉलेज आजाद नगर के मां सुशीला नरेन्द्रजीत सिंह सभागार में सम्पन्न हुआ।
उद्घाटन श्री अनिल ओक जी (अखिल भारतीय सह व्यवस्था प्रमुख राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) ने किया। श्री अनिल ओक जी ने कहा हम सौभाग्यशाली की ऐसे विशेष शिविर में आए हैं। दूसरा सौभाग्य है कि इसमें परम पूजनीय सरसंघचालक जी रहने वाले हैं। घोष संगीत की कला है। संगीत में ध्वनि होती है शंकर जी के डमरू में ध्वनि होती है श्री कृष्ण जी की बंशी में ध्वनि होती है सरस्वती जी की वीणा में ध्वनि उत्पन्न होती है विश्व में अनादि काल से ध्वनि उत्पन्न करने के तीन ही तरीके हैं।
जो कान को प्रिय लगे उसे संगीत कहते हैं जो अप्रिय लगे उसे शोर कहते हैं। जीवन भी एक संगीत है उसकी यदि लय और ताल ठीक से चलती रहे तो दूसरे के लिए प्रेरणादाई होती है। जीवन का संगीत तब ठीक होता है जब लोग व्यक्ति से मिलने के लिए बार बार सोचे। घोष में ताल, लय तथा स्वर तीनों सुंदर होते हैं। संचलन यदि घोष के साथ चले तो सेना का प्रदर्शन याद आता है यदि घोष न हो तो वह भीड़ हो जाती है। स्वयंसेवक घोष के माध्यम से भी संघ कार्य करना चाहते हैं। संघ में हम व्यक्ति निर्माण करते हैं वह व्यक्ति बाद में समाज में जाकर संघ के स्वरूप को स्पष्ट करता है। देश हमें देता है सब कुछ हम भी तो कुछ देना सीखे इस भाव से हम सब यहां आए हैं। हम सभी अपना शुल्क अपना गणवेश अपना समय देकर घोष शिविर में घोष सीखने के लिए आए हैं।

स्वर संगम घोष शिविर में 21 जिलों से 973 शिविरार्थी हैं 50 शिक्षक एवं 200 कार्यकर्ता व्यवस्था में है।

उद्घाटन सत्र में प्रमुख रूप से श्री ज्ञानेंद्र सचान जी (प्रांत संघचालक), श्री ओमकार अवस्थी जी (शिविर कार्यवाह), श्री जगदीश जी (अखिल भारतीय सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख), श्री अनिल जी (क्षेत्र प्रचारक), श्री अजीत अग्रवाल जी (सह शिविर कार्यवाह), श्री अनिल श्रीवास्तव जी (प्रांत कार्यवाह), श्री भवानी भीख तिवारी जी (सह प्रांत कार्यवाह), श्री श्रीराम जी (प्रांत प्रचारक), श्री रमेश जी (सह प्रांत प्रचारक), श्री प्रहलाद खंडेलवाल जी (सर्व व्यवस्था प्रमुख), डॉ अनुपम जी (प्रांत प्रचार प्रमुख), श्री गौरांग दिक्षित जी (प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख), श्री अमीर सिंह जी (सह प्रांत शारीरिक शिक्षण प्रमुख), श्री अविनाश जी (शिविर मुख्य शिक्षक), श्री मनोज जी (सह मुख्य शिक्षक) उपस्थित रहे।