बी.एल.सूर्यवंशी रिपोर्टर



मध्यप्रदेश के धार जिले की बदनावर तहसील में महिला बाल विकास विभाग कोई कायदे नियम में नही है। चाहे रविवार हो या सोमवार अधिकारी द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को किसी भी बहाने चाहे मीटिंग हो चाहे रिकार्ड संधारण का काम हो जो भी काम हो शासन के नियम के विपरीत किया जा रहा है। एवं शासन-प्रशासन के नियमों की धज्जियां सरेआम उड़ाई जा रही हैं। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका को रविवार हो या शनिवार रिकॉर्ड संधारण करने के नाम पर सुबह से लेकर रात की 9:30 व 10:30 बजे तक महिलाओं को महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा रात में रोका जा रहा है। उधर कुछ महिलाओं ने शनिवार को शिकायत करने के बावजूद भी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता व सहायिकाओं को रविवार के रोज भी बुलाया गया हैं। जिससे प्रतीक होता नजर आ रहा है कि महिला बाल विकास अधिकारी द्वारा शासन के नियमो की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। शासन-प्रशासन के नियमानुसार महिला विभाग होने के कारण महिला बाल विकास अधिकारी महिला ही इस पद पर होना चाहिए किंतु बदनावर में विगत कई वर्षों से अधिकारी के रूप में पुरुष जमे हुए हैं। और अपना उल्लू सीधा कर रहे है। इस संबंध में उक्त पीड़िता आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका ने बताया कि हमें नौकरी से हटा देंगे ऐसे दबाव में अधिकारी द्वारा ब्लैकमेल किया जाता है। साथ ही राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी हमें गुमराह किया जा रहा है। समस्त बदनावर तहसील की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि महिला बाल विकास अधिकारी को एक महिला अधिकारी के रूप में पदस्थ किया जाए। ताकि हम बेबस लाचार कम वेतन वाली महिलाएं समय का सदुपयोग कर सकें। व हमारे घर का काम भी सुचारू रूप से कर सकें।

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