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Dharmendra Singh

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April 10, 2026

सच दिखाने की हिम्मत

संभागीय ब्यूरो चीफ पंडित नंदन शर्मा

“लाडली बहना के नाम पर भांजे भांजियों के भविष्य को अंधकार में डुबोते शिवराज मामा””लाडली बहना के नाम पर भांजे भांजियो के भविष्य को अंधकार में डुबो ते शिवराज(अंजली जयप्रकाश जोशी सनावद जिला खरगोन) सनावद (संभागीय ब्यूरो चीफ पंडित नंदन शर्मा ) सनावद की शिक्षिका अंजली शर्मा ने बताया की मामा”लाडली बहना के नाम पर खूब वाहवाही लूटने वाले शिवराज मामा को यह ज्ञात नहीं की यह योजना शुरू करके वह प्रदेश का भला नहीं कर रहे बल्कि उसे और गर्त में ले जा रहे हैं। चुनाव जीतने के लिए बहनों को ₹1000 प्रति माह का प्रलोभन देकर मामा जी चुनाव तो जीत लेंगे किंतु मध्य प्रदेश की आर्थिक स्थिति की इतनी दुर्गति कर देंगे कि आने वाले कई सालों में भी उसकी भरपाई संभव नहीं हो पाएगी।
आश्चर्य तो इस बात का है कि हमारे प्रदेश की पढ़ी-लिखी जनता कैसे इन प्रलोभनों में फ‌स जाती है? कोई इन नेताओं से यह प्रश्न क्यों नहीं करता कि ऐसी मुफ्त की रेवड़ियां बांटने में खर्च होने वाले अरबों रुपए कहां से आएंगे?
अगर हम लाडली बहना योजना में हुए नामांकन की बात करें तो तकरीबन 1 करोड़ 25 लाख बहनों का इसमें नामांकन हो चुका है जिनके मुताबिक इस योजना में खर्च होने वाली राशि लगभग 12 अरब 50 करोड़ प्रतिमाह होगी। क्या सरकार इस प्रश्न का जवाब दे सकती है कि वह यह अतिरिक्त बोझ,जो हमारे प्रदेश के खजाने पर डाल रही है,यह पैसे आएंगे कहां से? वह भी उस स्थिति में जब हमारे प्रदेश में पहले से ही घाटे का बजट है।
यह कोई छोटी मोटी धनराशि नहीं है। यदि हम इस धनराशि को मात्र 4% ब्याज पर भी बैंक में रखें तो इससे हर महीने प्राप्त होने वाला ब्याज ही लगभग 5 करोड़ के आस पास होगा और इस ब्याज से प्रतिमाह ढाई हजार लोगों को 20000 सैलेरी पर काम दिया जा सकता है।हमारे प्रदेश में आज इतनी बेरोजगारी है, यदि सरकार चाहे तो इन पैसों का सदुपयोग करके कई घरों को जीविका दे सकती है। आज मध्यमवर्गीय परिवारों के कई बच्चे पैसों के अभाव में उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं ,लाखों पढ़े-लिखे युवा बेरोजगार घूम रहे हैं और महंगाई इतनी ज्यादा बढ़ चुकी है कि दो वक्त की भोजन की थाली की व्यवस्था करना भी एक कठिन कार्य हो गया है। ऐसे में प्रदेश पर हर माह का यह अतिरिक्त बोझ बढ़ाना क्या सही होगा ?
इस लेख के माध्यम से मेरा सरकार से बस यही निवेदन है कि ऐसी योजनाओं में मुफ्त पैसा बांटकर जनता को पंगु और आलसी बनाने की बजाय उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाएं जिससे उनकी लाडली बहन और भांजे भांजियां 1000 की जगह उससे कहीं ज्यादा अपनी मेहनत से कमा सकें। इससे प्रदेश की आर्थिक स्थिति भी सुधरेगी और हम प्रदेश पर होने वाले अतिरिक्त कर्ज से भी बच पाएंगे।